लैपिस लाजुली (Lapis Lazuli)

लैपिस लाजुली (Lapis Lazuli): यह अपने चमकीले नीले रंग के लिए जाना जाता है और पिछले 6,000 वर्षों से इसका खनन किया जा रहा है। अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में इसकी सर्वोत्तम गुणवत्ता पाई जाती है।

  • लैपिस लाजुली के बारे में: यह एक चमकदार नीली शिला है, जिसमें कभी-कभी सोने जैसी धारियाँ पाई जाती हैं। इसका उपयोग अर्ध-कीमती रत्न के रूप में किया जाता है।
  • रंग का स्रोत: इसका रंग लाज्युराइट (lazurite) (25–40%) से प्राप्त होता है।

o नीलेपन की तीव्रता लाज्युराइट में गंधक (sulphur) की मात्रा और संरचना पर निर्भर करती है।

o कैल्साइट (Calcite) नीलेपन को कम करता है, जबकि सोने जैसी चमक पायराइट (pyrites) से आती है।

  • उपस्थिति: अफगानिस्तान, चिली, रूस और अमेरिका में पाया जाता है।

o अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला लैपिस लाजुली पाया जाता है, जहाँ पिछले 6,000 वर्षों से खनन किया जा रहा है।

  • ऐतिहासिक महत्व: भारत में 1000 ईसा पूर्व के आसपास व्यापार के माध्यम से आया। → सिंधु सभ्यता के मोहनजोदड़ो और हड़प्पा स्थलों में पाया गया। → प्राचीन मिस्रवासियों द्वारा आभूषण और आई शैडो (नेत्र सज्जा) के पाउडर के रूप में उपयोग। → पुनर्जागरण काल में, इसे पीसकर चित्रों के लिए अल्ट्रामरीन रंगद्रव्य बनाया जाता था।
  • लाज्युराइट के बारे में: यह सोडालाइट समूह का सदस्य है, जिसका वर्णन पहली बार 1890 में अफगानिस्तान के बदख्शां के सर-ए-संग जिले में किया गया था।

o यह लगभग विशेष रूप से ठोस रूप (massive form) में पाया जाता है, जिसमें स्पष्ट क्रिस्टल नहीं होते।

o प्रकाशीय गुण:  रूप (Form) - दानेदार, बिखरा हुआ, या ठोस; कभी-कभी द्वादशीफलकीय या घनाकार क्रिस्टल के रूप में, रंग (Colour) - गहरा नीला, उभार (Relief) - निम्न, हस्तक्षेप रंग (Interference Colours) - समदिशीय (isotropic), कभी-कभी विषमदिशीय (anomalously anisotropic) ।