डेरिवेटिव्स

डेरिवेटिव्स: हाल ही में, 10 मार्च 2025 को इंडसइंड बैंक ने ₹2,100 करोड़ के डेरिवेटिव घाटे की सूचना दी, जिसके कारण इसके शेयर मूल्य में 23% की गिरावट आई।

  • डेरिवेटिव्स के बारे में: यह ऐसे वित्तीय अनुबंध होते हैं जिनका मूल्य किसी अंतर्निहित परिसंपत्ति, सूचकांक या दर पर निर्भर करता है।
  • उद्देश्य: जोखिम से बचाव (hedging), सट्टा लगाना (speculation), और पोर्टफोलियो विविधीकरण के लिए उपयोग किया जाता है।
  • सामान्य अंतर्निहित परिसंपत्तियाँ: स्टॉक्स, बॉन्ड्स, कमोडिटीज़, मुद्राएँ, ब्याज दरें, और बाजार सूचकांक।
  • डेरिवेटिव्स के प्रकार:

o फ्यूचर्स (Futures): यह भविष्य की एक निश्चित तिथि पर एक तय मूल्य पर किसी परिसंपत्ति को खरीदने/बेचने का अनुबंध होता है।

ü उदाहरण के लिए, कमोडिटी व्यापारी मूल्य में उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए हेजिंग करते हैं।

o ऑप्शन्स (Options): यह (लेकिन अनिवार्य नहीं) एक अधिकार देता है कि एक निश्चित तिथि से पहले एक तय मूल्य पर खरीद (Call) या बिक्री (Put) की जाए।

ü उदाहरण के लिए, इक्विटी बाजार में स्टॉक ऑप्शन

o स्वैप्स (Swaps): वित्तीय संकेतकों के आधार पर नकदी प्रवाह (cash flows) को विनिमय करने के अनुबंध।

ü उदाहरण के लिए, ब्याज दर स्वैप्स, उधार लागत को कम करने हेतु। 

o फॉरवर्ड्स (Forwards): यह निजी अनुबंध (OTC) होते हैं, जिनमें भविष्य की किसी तिथि को परिसंपत्ति को खरीदने/बेचने के अनुबंध होते है।

ü उदाहरण के लिए, आयातकों/निर्यातकों के लिए मुद्रा फॉरवर्ड अनुबंध

  • एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स (ETCDs) के बारे में: ये मानकीकृत अनुबंध होते हैं, जो निवेशकों को भविष्य में मुद्रा विनिमय दरों में संभावित बदलावों पर सट्टा लगाने की अनुमति देते हैं।

o विशेषता: यह स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं, जबकि ओवर-द-काउंटर (OTC) डेरिवेटिव्स निजी होते हैं।