मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने हरियाणा सरकार की पहली तिमाही में सभी गर्भवती महिलाओं का अनिवार्य पंजीकरण कराने की पहल की सराहना की है, लेकिन यह भी बताया कि यह मौजूदा मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम (MTP Act) का उल्लंघन करता है, जो महिला के प्रजनन अधिकार को केवल उसका व्यक्तिगत अधिकार मानता है।

  • MTP अधिनियम के बारे में: यह अधिनियम गर्भपात तक पहुंच को उदार बनाने हेतु लाया गया था क्योंकि भारतीय दंड संहिता (IPC) में प्रतिबंधात्मक प्रावधानों के कारण महिलाएं असुरक्षित और खतरनाक तरीकों से गर्भपात करवा रही थीं।
  • मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी संशोधन अधिनियम, (MTPAA) 2021: यह अविवाहित महिलाओं को भी इस कारण से गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देता है, विशेष श्रेणियों की महिलाओं (यौन उत्पीड़न, बलात्कार या व्यभिचार की पीड़ित; नाबालिग; आदि) के लिए गर्भावधि की अधिकतम सीमा 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दी गई है।

o चिकित्सकीय बोर्ड: सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारें एक मेडिकल बोर्ड का गठन करेंगी, जो निर्णय लेगा कि क्या 24 सप्ताह के बाद गर्भपात किया जा सकता है।

o धारा 5A (2021 में संशोधित): यह गोपनीयता सुनिश्चित करती है, और गर्भपात कराने वाली महिलाओं का नाम और विवरण केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही दिया किया जा सकता है।