मुक्त आवागमन व्यवस्था ( FMR)

मुक्त आवागमन व्यवस्था ( FMR): फरवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने म्यांमार सीमा पर मुक्त आवागमन व्यवस्था (FMR) को समाप्त करने की घोषणा की।

  • विदेश मंत्रालय या भारत-म्यांमार के द्विपक्षीय समझौते द्वारा अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
  • FMR के बारे में: यह 1968 में शुरू की गई थी, उन लोगों के लिए जिनके सीमा पार पारिवारिक एवं जातीय संबंध हैं।

o यह भारत और म्यांमार के सभी पहाड़ी जनजातियों (hill tribes) को भारत-म्यांमार सीमा (IMB) के दोनों ओर 16 किमी तक यात्रा की अनुमति देता है।

o यात्रियों को एक वर्षीय वैधता वाला सीमा पास प्रस्तुत करना होता है, जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया जाता है।

o प्रत्येक वीज़ा पर 2 सप्ताह तक ठहरने की अनुमति होती है।

o इसे 2018 में केंद्र सरकार की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के तहत लागू किया गया था।

o यह भारत और म्यांमार दोनों द्वारा संयुक्त रूप से उन समुदायों के लिए कार्यान्वित किया गया था जो भारत-म्यांमार सीमा (IMB) के किनारे रहते हैं।

o यह सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देता है, जिसमें शादियाँ, सामूहिक त्यौहार और सीमापार व्यापार शामिल हैं।

o यह सीमा-पार गांवों के बीच भौतिक, जातीय, भाषाई, सांस्कृतिक और भ्रातृ-संबंधों को दर्शाता है।

  • भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े प्रमुख तथ्य: इसकी कुल लंबाई 1,643 किमी है और यह मिज़ोरम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है।

o विस्तार: उत्तर में चीन  से लेकर त्रिबिंदु (Tripoint with China) और  दक्षिण में बांग्लादेश से त्रिबिंदु (Tripoint with Bangladesh) तक फैली है।

o निगरानी: असम राइफल्स द्वारा।