अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA): IAEA द्वारा समर्थित अफ्रीका में परमाणु विस्तार को चीन के प्रभुत्व के रूप में देखा जा रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा भू-राजनीति और भारत की यूरेनियम संसाधनों तक पहुंच को प्रभावित करता है।

  • IAEA के बारे में: IAEA की स्थापना 1957 में संयुक्त राष्ट्र (UN) के अंतर्गत एक स्वायत्त एजेंसी के रूप में की गई थी। इसे संयुक्त राष्ट्र परिवार के भीतर "Atoms for Peace" संगठन के रूप में स्थापित किया गया।

o उद्देश्य: परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और इसके दुरुपयोग को रोकना।

o मुख्यालय: वियना, ऑस्ट्रिया।

  • कार्य: परमाणु ऊर्जा विकसित कर रहे देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है।

    o हथियार प्रसार को रोकने के लिए परमाणु सुरक्षा उपायों (nuclear safeguards) को लागू करता है।

    o सुरक्षा मूल्यांकन करता है और परमाणु सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

    • भारत और IAEA: भारत ने IAEA दिशा-निर्देशों के अंतर्गत असैन्य परमाणु समझौते किए हैं, जिनमें रिएक्टरों और यूरेनियम आपूर्ति समझौतों के लिए सुरक्षा उपाय सम्मिलित हैं।
    • IAEA की अफ्रीका में भूमिका: अफ्रीकी देशों में परमाणु अवसंरचना विकास का समर्थन करता है।

    o कार्मिकों के प्रशिक्षण और सुरक्षा अनुपालन सुनिश्चित करने में सहायता करता है।

    o अफ्रीका में चीन का परमाणु विस्तार IAEA मानकों के अनुरूप है, लेकिन इससे भू-राजनीतिक प्रभाव और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।