हाल ही में लोकसभा में संसद में एक साथ व्याख्या वाली भाषाओं की सूची में संस्कृत को जोड़ने को लेकर अध्यक्ष और एक सांसद के बीच तीखी बहस देखी गई।
o अपवाद: यदि कोई सदस्य हिंदी या अंग्रेजी में अभिव्यक्त नहीं कर सकता है, तो अध्यक्ष या सभापति उसे मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकते है।
o मूल प्रस्ताव: संसद में आधिकारिक भाषाएँ हिंदी और अंग्रेजी होंगी, और जो इन दोनों में नहीं बोल सकते, उनके लिए अपवाद होगा।
o स्वीकृति: संविधान सभा ने इस संशोधन को स्वीकार कर 17 सितंबर 1949 को मसौदा अनुच्छेद 99 को अपनाया।
o आधिकारिक भाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3 के तहत, संघ के आधिकारिक उद्देश्यों और संसद में उपयोग के लिए अंग्रेजी को जारी रखने का प्रावधान है।
o संविधान की आठवीं अनुसूची भारत की आधिकारिक भाषाओं को सूचीबद्ध करती है।
आधिकारिक भाषा आयोग के बारे में: यह राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 344 के तहत स्थापित किया गया था। 1955 में गृह मंत्रालय की अधिसूचना के माध्यम से इसका गठन किया गया था।