NOTTO

NOTTO: हाल ही में नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) ने एक नया निर्देश जारी किया है, जिसमें महिला रोगियों और मृतक दाताओं की महिला परिजनों को अंग आवंटन में प्राथमिकता देने की घोषणा की गई है।

o यह कदम अंग प्रतिरोपण में लैंगिक असमानता को दूर करने और देशभर में अधिक दान को प्रोत्साहित करने हेतु 10-बिंदुीय सलाह का हिस्सा है।

  • मुख्य बिंदु: 2019 से 2023 के बीच 63.8% जीवित अंग दाताओं में महिलाएं थीं, लेकिन 69.8% अंग प्राप्तकर्ता पुरुष थे।

o 56,509 जीवित अंग दानों में से, 36,038 महिलाओं द्वारा किए गए, लेकिन केवल 17,041 अंग महिलाओं को मिले, जबकि 39,447 अंग पुरुषों को मिले।

o यह भारत में “अंग प्रत्यारोपण विरोधाभास” को दर्शाता है: महिलाएं सबसे अधिक दान करती हैं, लेकिन उन्हें सबसे कम प्राप्त होता है।

o भारत में अंग दान मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत होता है, जिसे 2011 में संशोधित कर मानव ऊतकों को शामिल किया गया था। यह अधिनियम अंगों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाता है और इसका उल्लंघन करने पर सख्त कानूनी और आर्थिक दंड है।

o वैश्विक स्तर पर, हर वर्ष 1,30,000 से अधिक ठोस अंग प्रत्यारोपण किए जाते हैं, जो वैश्विक मांग का केवल 10% ही पूरा करते हैं।

o भारत में हर साल 1.8 लाख लोग अंतिम चरण की किडनी बीमारी से ग्रसित होते हैं, लेकिन केवल लगभग 12,000 किडनी प्रत्यारोपण ही किए जाते हैं।


Join us on Telegram